नेपाल से निकलने वाली तमाम नदियां और इनके कारण प्रत्येक साल आने वाली बाढ ही राज्य में बालश्रम को बढावा देती है। यह कहना है राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का। कल बाल श्रमिक आयोग और बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यशाला में श्री मोदी ने बताया कि उन जिलों से मजदूरों का पलायन अधिक होता है जहां हर साल बाढ और सुखाड़ का संकट आता है। यही कारण है कि बच्चों को बालश्रमिक होने पर मजबूर होना पड़ता है।
श्री मोदी ने बताया कि बाल श्रम का मुख्य कारण गरीबी है और इसलिये गरीबी दूर किये बगैर इस समस्या पर विजय नहीं पाया जा सकता है। लेकिन इसके लिये केवल इतना ही काफ़ी नहीं होगा कि गरीबी खत्म होने का इंतजार किया जाये। इसलिये राज्य सरकार ने गरीबी दूर करने के अलावे बाल श्रम उन्मूलन के लिये भी समानांतर प्रयास कर रही है। इन्होंने बताया कि साईकिल योजना के कारण बच्चों में शिक्षा के प्रति लोभ जगा है। अब बच्चे और बच्चियां नवें वर्ग तक इसलिये भी पढना चाहते हैं कि नवें वर्ग में जाने पर उन्हें साइकिल मिलेगी।
इससे पहले अपने संबोधन में बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद ने यह कहकर सनसनी फ़ैला दी कि बाल श्रमिक आयोग में वेतन के मद में 86 लाख रुपये और बाल श्रम उन्मूलन के लिये केवल 4 लाख रुपये खर्च करने का बजटीय आवंटन किया गया है। इन्होंने यह भी कहा कि नेशनल चाईल्ड लेबर प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार द्वारा दिये गये 54 करोड़ रुपये की राशि कहां है, इसकी जानकारी भी सरकार के पास नहीं है।
हालांकि अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार को नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट को बंद कर देना चाहिये। इन्होंने यहां तक कहा कि केंद्र को सारी योजनायें बंद कर देनी चाहिये क्योंकि केंद्र सरकार को खुद याद नहीं है कि वह कितनी योजनायें चला रही है। इन्होंने कहा कि राज्य में बाल श्रमिकों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2001 में यह 11 लाख थी जो अब घटकर 6 लाख रह गई है। इसका श्रेय अपनी सरकार को देते हुए श्री मोदी ने इसमें मनरेगा आदि योजनाओं की सफ़लता से पूर्णतया इन्कार करते हुए कहा कि अब तो सूरत, अहमदाबाद, नेपाल और दिल्ली आदि के व्यवसायी बिहार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनके यहां मेहनतकश बिहारी मजदूरों के नहीं रहने के कारण संकट पैदा हो गया है।
कार्यशाला में राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष निशा झा, बाल श्रमिक आयोग की उपाध्यक्ष अनिता सिन्हा, जाने माने बाल अधिकार विशेषज्ञ महावीर जैन और राज्य के विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।